हरिद्वार शहर के विख्यात गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के छात्र- छात्राओं ने मिलकर गुरुकुल प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और धन के दुरुपयोग सहित लैंगिक भेदभाव का आरोप लगाया। कुलपति कार्यालय के बाहर आन्दोलन करते हुए छात्रों और छात्राओं ने कहा कि गुरुकुल में आज भी सामन्तवादी सोच हावी है। आज भी छात्राओं को उनका अधिकार नहीं दिया जा रहा है। छात्राओं को अलग से कन्या गुरुकुल परिसर में पढ़ने को मजबूर किया जाता है जहाँ न तो पर्याप्त संख्या में शिक्षिकाएँ है, न कक्षाएँ है, न खेल का मैदान, न सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए सभागार है।

फर्नीचर टूटा-फूटा है। कमरों में सीलन और गंदगी पसरी पड़ी हैं। विज्ञान विषयों में प्रयोगशालाएँ है। भौतिक विज्ञान की छात्राओं को प्रशिक्षण के लिए मुख्य परिसर में लाया जाता है। जबकि गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय को हरिद्वार में अलग परिसर चलाने की अनुमति भी नहीं है। बराबर मांग किए जाने पर भी छात्राओं को मुख्य परिसर में पढ़ने की अनुमति यह कहकर नहीं दी जाती है कि गुरुकुल में छात्र-छात्राओं को एक साथ पढ़ाने की अनुम परम्परा नहीं है। यदि ऐसा है तो कोई महिला अध्यापिका विभागध्यक्ष, संकायाध्यक्ष और कुलपति कैसे बन गई है? पी.एच.डी की छात्राएँ मुख्य परिसर में छात्रों के साथ ही शोध कार्य करती है तो स्नातक और स्नातकोत्तर में ही ऐसा बंधन क्यों ? आन्दोलन कर रहे छात्र – छात्राओं ने आगे कहा कि गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय केन्द्र सरकार से अनुदान पाता है।
ऐसे में अगर केन्द्र सरकार की यह निति है कि हरिद्वार में छात्र-छात्राओं के परिसर अलग-अलग होने चाहिए तो प्रशासन ऐसा आदेश दिखाए। यदि नही तो छात्राओं को मुख्य परिसर में पढ़ने को अनुमति मिलनी चाहिए। छात्राऐं भी उतनी ही फीस भरती है जितना छात्र भरते है तो उन्हें सुविधाओं से क्यों वंचित किया जा रहा है ?-‘अपनी मांगो का पत्र आन्दोलनरत छात्र – छात्राओं ने कुलपति को 1 सौंपा और तीन दिन का अलटोमेटम दिया। यदि कुलपति कोनिकाला गया तो भविष्य में होने वाले आन्दोलन की गम्भीरता के लिए विश्वविद्यालय जिम्मेदार होगा। प्रदर्शन करने वालो में मानसी भार्गव, रुद्राक्षणी, श्रुति, वंशिका ठाकुर, खुशी, भव्य, राधिका, दीक्षा, भारती, सपना तथा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से देव सिंह, सूर्य प्रताप, विशाल भारद्वाज, केशव राव, मनन शर्मा, हरी ओम तिवारी सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

