कोटद्वार : पौड़ी गढ़वाल के कोटद्वार शहर से डेमोग्राफी चेंज की खबरें सामने आ रही हैं। इसमें सरकारी भूमि पर कब्जे कर बस्तियां बसाने में कांग्रेस के नेताओं के भूमिका संदिग्ध है। खास बात ये भी है यूपी से आए मुस्लिम अपनी महिलाओं के प्रसव कोटद्वार में करवा कर जन्म प्रमाण पत्र उत्तराखंड के बनवा रहे और और उसके आधार पर भविष्य की डेमोग्राफी चेंज की रेखाएं खींची जा रही है।
जानकारी के मुताबिक कोटद्वार में लकड़ी पड़ाव ऐसा क्षेत्र बन गया है जहां नजीबाबाद बिजनौर अफजलगढ़ क्षेत्रों के मुस्लिम लोग योजनाबद्ध तरीके से सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बस गए है खास बात ये कि उन्हें कांग्रेस के नेताओं के राजनीतिक संरक्षण देकर बसाया। इसी तरह आम पड़ाव में भी मुस्लिम आबादी ने घुसपैठ की और सरकार की भूमि कब्जा ली।
सरकारी महकमे को छकाने की नीति
जानकारी के मुताबिक इस सरकारी क्षेत्र को कब्जा कर उस पर हाईकोर्ट से स्टे ले लिया गया ताकि सरकारी महकमे के द्वारा इस मामले में खामोशी ओढ़ ली जाए। सूत्र बताते हैं कि लकड़ी पड़ाव और आम पड़ाव में ऐसी घनी मुस्लिम आबादी है कि यहां जाने का साहस कोई प्रशासनिक अधिकारी नहीं करता। यहां फर्जी दस्तावेज बना कर उत्तराखंड की सरकारी सुविधाओं का फायदा उठाया जा रहा है।
बताया जाता है कि यहां यदि सत्यापन अभियान चलाया जाए तो बहुत से घुसपैठियों का पर्दाफाश हो जाएगा।
खो नदी के किनारे मुस्लिमों का अवैध कब्जा
एक जानकारी ये भी सामने आई है कि कोटद्वार से निकलने वाली खो नदी के किनारे भी सरकारी नदी श्रेणी की भूमि पर बड़ी संख्या में यूपी के मुस्लिमों के अवैध कब्जे हो रहे हैं। ये भी जानकारी सामने आई है कि यहां की वोटरलिस्ट में ऐसे नाम भी है जोकि यूपी की वोटरलिस्ट में भी है। ये विषय एक बार यहां से विधायक रहे हरक सिंह रावत ने भी उठाया था। यहां कैंट एरिया में अवैध मजार बना दी गई है। जिसे लेकर पिछले कुछ समय से विवाद चल रहा है।
पिछले दिनों एक और विषय भी चर्चा में आया था कि कोटद्वार के अस्पतालों में ज्यादातर बच्चे यूपी की मुस्लिम महिलाओं के जन्म ले रहे है और इनके जन्म प्रमाण पत्र उत्तराखंड के बन रहे है। फर्जी दस्तावेज प्रमाण पत्र बनाकर आयुष्मान कार्ड भी उत्तराखंड के बनाए गए है। कल को यही बच्चे उत्तराखंड के नागरिक होने का दावा करेंगे। जिसे लेकर कई सवाल उत्तराखंड सरकार के समक्ष भी रखे गए है।
ये विषय स्थानीय विधायक और विधान सभा अध्यक्ष ऋतु भूषण खंडूरी के समक्ष भी सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उठा चुके हैं। बहरहाल ये कोटद्वार शहर डेमोग्राफी चेंज की दृष्टि से संवेदनशील हो चुका है। इस ओर धामी सरकार ने शीघ्र ध्यान नहीं दिया तो यूपी से लगता ये क्षेत्र भी सनातन संस्कृति को आघात पहुंचाने वाला हो जाएगा।

