बागेश्वर : उत्तराखंड की काशी के नाम से विख्यात पौराणिक धार्मिक नगरी बागेश्वर में माघ माह के पावन अवसर पर आयोजित होने वाले ऐतिहासिक उत्तरायणी मेले का शुभारंभ भव्य और रंगारंग झांकियों के साथ हो गया. सरयू, गोमती और विलुप्त सरस्वती के पवित्र संगम तट पर बसे इस नगर में मेले की शुरुआत के साथ ही आस्था, संस्कृति और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला.
धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक उत्तरायणी मेला
हर वर्ष आयोजित होने वाला उत्तरायणी मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह कुमाऊं की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जीवंत स्वरूप भी है. बाबा बागनाथ की पावन धरती पर लगने वाला यह मेला सदियों से लोगों की आस्था का केंद्र रहा है. मेले के पहले ही दिन नगर का वातावरण पूरी तरह उत्सवमय नजर आया.
भव्य झांकियों के साथ नगर भ्रमण
उत्तरायणी मेले के शुभारंभ अवसर पर तहसील परिसर से झांकियों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया. इस दौरान कपकोट और बागेश्वर के विधायक, जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे. झांकियां गोमती पुल, स्टेशन रोड, कांडा माल रोड, सरयू पुल और दूग बाजार से होते हुए नुमाइशखेत मैदान तक पहुंचीं. मुख्य बाजार से गुजरते समय झांकियों ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर दिया.
लोकनृत्य और पारंपरिक प्रस्तुतियां बनीं आकर्षण
झांकियों में दारमा घाटी से आए कलाकारों द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक नृत्य, ढोल-दमाऊ की गूंज और स्थानीय कलाकारों के झोड़ा व चांचरी नृत्य ने समां बांध दिया. विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने भांगड़ा, झोड़ा-चांचरी और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से उत्तराखंड की लोकसंस्कृति को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया.
छोलिया नृत्य और पारंपरिक वेशभूषा ने बढ़ाई शोभा
पारंपरिक वेशभूषा में सजी स्थानीय महिलाएं और छोलिया नृतक पूरे नगर में उत्साह और ऊर्जा का संचार करते दिखाई दिए. ढोल-नगाड़ों की थाप पर थिरकते कलाकारों ने दर्शकों को अपनी संस्कृति से जोड़े रखा. जगह-जगह लोग झांकियों का स्वागत करते नजर आए.
प्रभारी मंत्री ने किया मेले का औपचारिक उद्घाटन
ऐतिहासिक उत्तरायणी मेले का औपचारिक उद्घाटन अपराह्न दो बजे प्रदेश के प्रभारी मंत्री सौरभ बहुगुणा द्वारा किया गया. उद्घाटन के साथ ही मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों, विकास प्रदर्शनी, स्थानीय उत्पादों के स्टॉल और पारंपरिक खेलों की शुरुआत हो गई.
नगर पालिका का मेले को और भव्य बनाने का प्रयास
पालिका अध्यक्ष सुरेश खेतवाल ने कहा कि उत्तरायणी मेला बागेश्वर की पहचान है. यह ऐतिहासिक काल से बाबा बागनाथ की धरती पर आयोजित होता आ रहा है. नगर पालिका का प्रयास है कि मेले को हर वर्ष और अधिक आकर्षक, सुव्यवस्थित और भव्य बनाया जाए, ताकि पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सके.
जनप्रतिनिधियों ने दी शुभकामनाएं
कपकोट विधायक सुरेश गढ़िया ने उत्तरायणी पर्व पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह मेला हमारी सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है और नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ता है. वहीं बागेश्वर विधायक पार्वती दास ने कहा कि उत्तरायणी मेला सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक एकता और लोकपरंपराओं को सहेजने का महत्वपूर्ण माध्यम है.
आस्था और संस्कृति का जीवंत उत्सव
रंगारंग झांकियों, लोकनृत्यों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजा उत्तरायणी मेले का यह शुभारंभ एक बार फिर साबित करता है कि यह आयोजन केवल मेला नहीं, बल्कि कुमाऊं की आत्मा, आस्था और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत उत्सव है.
संगम तट पर सजी उत्तराखंड की काशी, उत्सवमय हुई पौराणिक नगरी
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