नैनीताल: उत्तराखंड के नैनीताल स्थित बाबा नीम करौली महाराज की तपोस्थली और आस्था के प्रमुख केंद्र हनुमानगढ़ी धाम को अब नया और भव्य स्वरूप मिलने जा रहा है. राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी मानसखंड मंदिरमाला मिशन के तहत इस ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल का व्यापक सौंदर्यकरण किया जाएगा. परियोजना का उद्देश्य न केवल मंदिर की धार्मिक गरिमा को और सुदृढ़ करना है, बल्कि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराकर इसे आध्यात्मिक पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करना भी है.
हनुमानगढ़ी धाम कुमाऊं क्षेत्र ही नहीं, बल्कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आस्था का बड़ा केंद्र है. हर साल लाखों भक्त यहां भगवान हनुमान के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. ऐसे में बढ़ती भीड़ और सुविधाओं की आवश्यकता को देखते हुए सरकार ने इसे मानसखंड मंदिरमाला मिशन के फेज-2 में शामिल किया है.
मानसखंड मंदिरमाला के तहत होगा सौंदर्यकरण
नैनीताल लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता रत्नेश सक्सेना ने बताया कि मानसखंड मंदिर परियोजना के तहत मंदिर तक पहुंचने वाले मार्गों का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण किया जाएगा, जिससे यातायात सुगम हो सके. प्रवेश द्वार और मंदिर परिसर को पारंपरिक पहाड़ी स्थापत्य शैली में विकसित किया जाएगा, ताकि इसकी सांस्कृतिक पहचान बनी रहे.
मंदिर परिसर में बेहतर प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल, आधुनिक शौचालय, बैठने की सुव्यवस्थित व्यवस्था और साफ-सफाई की पुख्ता सुविधाएं विकसित की जाएंगी. इसके साथ ही श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए दर्शन व्यवस्था को और सरल बनाया जाएगा. सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, सीसीटीवी निगरानी, संकेतक बोर्ड और भीड़ प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा. परिसर में हरियाली बढ़ाने और प्राकृतिक सौंदर्य को संरक्षित रखने की योजना भी परियोजना का अहम हिस्सा है.
शीतला देवी मंदिर का भी होगा सौंदर्यकरण
रत्नेश सक्सेना ने बताया कि प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज हो चुकी हैं. मानसखंड फेज-2 के तहत हनुमानगढ़ी में कार्य किए जाने हैं. पूर्व में पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल द्वारा टेंडर प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए थे, जिसके बाद टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और प्रस्ताव विभाग को भेजा जा चुका है. इसके अलावा विस्तृत प्लान तैयार कर पार्किंग निर्माण और शीतला माता मंदिर के सौंदर्यकरण की भी योजना बनाई गई है, जिससे पूरे क्षेत्र का समग्र विकास हो सके.
बाबा नीम करौली की तपोस्थली रहा है हनुमानगढ़ी
हनुमानगढ़ी धाम का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व भी अत्यंत विशेष है. यह स्थान बाबा नीम करौली महाराज और सोमवारी महाराज की तपोस्थली रहा है. नैनीताल शहर से लगभग दो किलोमीटर की दूरी पर नैनीताल-हल्द्वानी राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित इस पवित्र स्थल पर बाबा नीम करौली 1950 में आए थे. उन्होंने यहां अपने अनुयायियों के साथ एक छोटी सी कुटिया बनाई और साधना की.
बाद में उन्होंने यहां हनुमान जी की एक छोटी मूर्ति की स्थापना की. साल 1953 में बड़े हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित की गई, जिससे हनुमानगढ़ी की आध्यात्मिक यात्रा ने गति पकड़ी. इसके बाद 1955 में राम मंदिर और 1956-57 के बीच शिव मंदिर का निर्माण भी बाबा नीम करौली महाराज ने यहीं कराया. तभी से यह स्थल श्रद्धा, भक्ति और साधना का प्रमुख केंद्र बन गया. मानसखंड मंदिरमाला मिशन के तहत होने वाला यह सौंदर्यकरण न केवल हनुमानगढ़ी धाम की धार्मिक महत्ता को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा, बल्कि नैनीताल और पूरे कुमाऊं क्षेत्र में आध्यात्मिक पर्यटन को भी नया आयाम देगा.
नैनीताल: हनुमानगढ़ी धाम बनेगा अब दिव्य और भव्य, बदल जाएगा दर्शन का अनुभव
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