नई दिल्ली। हर साल आत्मा के कारक सूर्य देव के धनु राशि से निकलकर मकर राशि में गोचर करने की तिथि पर मकर संक्रांति मनाई जाती है। यह पर्व पूर्णतः आत्मा के कारक सूर्य देव को समर्पित होता है। इस शुभ अवसर पर बड़ी संख्या में साधक गंगा समेत पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी लगाते हैं। इसके बाद पूजा, जप-तप और दान-पुण्य करते हैं। वहीं, मकर संक्रांति के दिन पितरों का तर्पण भी किया जाता है।
सनातन शास्त्रों में निहित है कि मकर संक्रांति के दिन राजा सगर के पुत्रों को मां गंगा की कृपा से मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। इसके लिए मकर संक्रांति के दिन गंगासागर मेला का आयोजन किया जाता है। यह पर्व देश भर में धूमधाम से मनाया जाता है। हालांकि, मकर संक्रांति तिथि को लेकर लोगों में दुविधा है। कई जगहों पर 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जा रही है। वहीं, कई जगहों पर 15 जनवरी को मकर संक्रांति (Makar Sankranti date confusion) मनाई जाएगी। आइए, 15 जनवरी के दिन मकर संक्रांति मनाने का ज्योतिषीय गणित समझते हैं-
सूर्य गोचर 2026
आत्मा के कारक एक राशि में 30 दिनों तक रहते हैं। इसके बाद राशि परिवर्तन करते हैं। सूर्य देव के धनु और मीन राशि में रहने के दौरान खरमास लगता है। वहीं, सूर्य देव के मकर और मेष राशि में गोचर करने के साथ ही खरमास समाप्त हो जाता है। सूर्य देव के मकर राशि में गोचर करने का खास महत्व है। इस दिन से सूर्य उत्तरायण होते हैं। सूर्य उत्तरायण का तात्पर्य उत्तर की ओर गमन करने से है। उत्तरायण का समय देवताओं के दिन का होता है।
ज्योतिषियों की मानें तो 14 जनवरी (अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार) को दोपहर 03 बजकर 43 मिनट पर सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में गोचर किया है। इसकी भविष्यवाणी भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा समेत कई विद्वानों ने की है। इस गणना के अनुसार, 14 जनवरी के दिन मकर संक्रांति मनाई जा रही है। वहीं, हृषिकेश पञ्चांग की गणना भिन्न है। इसके लिए कई जगहों पर 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जाएगी।
हृषिकेश पंचांगकी गणना
हृषिकेश पंचांग को काशी विश्वनाथ पंचांग भी कहा जाता है। यह अन्य पंचांगों जैसे ठाकुर पंचांग और कालनिर्णय समान और प्रतिष्ठित है। बड़ी संख्या में लोग हृषिकेश पंचांग का अनुसरण करते हैं। खासकर, काशी और उसके आसपास के क्षेत्रों में हृषिकेश पञ्चांग का विशेष महत्व है।
हृषिकेश पंचांग की मानें तो आत्मा के कारक सूर्य देव 14 जनवरी को रात 09 बजकर 39 मिनट पर धनु राशि से निकलकर मकर राशि में गोचर करेंगे। वहीं, पुण्य काल दोपहर 01 बजकर 39 मिनट पर है। हृषिकेश पञ्चांग के जानकारों की मानें तो संक्रांति पर पुण्य काल का वरण 16 घंटे का होता है। इस प्रकार 15 जनवरी को संक्रांति मनाना (January 14 vs January 15 Sankranti) श्रेष्ठकर होगा। इस दिन यानी 15 जनवरी को गंगा स्नान करना, तिल दान, वस्त्र दान, पादुका दान और गर्म कपड़ों का दान करना उत्तम होगा।
क्यों कुछ लोग 14 जनवरी नहीं, 15 को मनाएंगे मकर संक्रांति?
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