कांग्रेस नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत आजकल काफी सक्रिय नजर आ रहे हैं। सरकार की विभिन्न नीतियों पर प्रहार करते हुए वह आम जनता की समस्याओं के साथ भी खड़े हुए नजर आते हैं। कल हरीश रावत हरिद्वार के रोशनाबाद से लेकर पेंटागन मॉल तक एक पदयात्रा में शामिल हुए। यह पदयात्रा श्रमिकों की लड़ाई के लिए थी।

किस पदयात्रा के माध्यम से हरीश रावत ने सरकार के कानून में अपनी कुछ प्रमुख मांगों को रखने का प्रयास किया जो कि इस प्रकार थी
1- उत्तराखंड सरकार द्वारा भेल की 492 एकड़ एवं अन्य खाली जमीन को लेने का प्रस्ताव वापस लिया जाए।
2- भेल में कार्य की अधिकता को देखते हुए आर्टिजन की भर्ती प्रारंभ की जाए।
3- 2014 के बाद से भेल हरिद्वार से छटनी किये जा रहे संविदा श्रमिकों को वापस लिया जाए। 4-भेल में स्थित केंद्रीय विद्यालय को पूर्व की भांति चालू कर सभी कक्षाओं में प्रवेश प्रारंभ किए जाए।
5-पंचम फेस का निस्तारण कर आवेदकों को प्लॉट/फ्लैट शीघ्र उपलब्ध कराए जाएं।
6-सिडकुल में उत्तराखंड के बेरोजगार युवाओं के लिए घोषित 70% आरक्षण की नीति का पूर्णतया पालन कराया जाए।
7-सिडकुल में श्रम कानूनों का पूर्णतयः पालन कराते हुए कर्मचारियों का शोषण बंद किया जाए।
8-सिडकुल में कर्मचारियों से 12 घंटे के स्थान पर 8 घंटे काम लिया जाए।
9-सिडकुल में संविदा कर्मियों को उत्तराखंड सरकार का मिनिमम वेज देना सुनिश्चित किया जाए।
10-सिडकुल कंपनियों से 2014 के बाद निकाले गए लगभग 30000 कर्मचारियों को नौकरी पर वापस लिया जाए।
11-सिडकुल में 2014 के बाद बंद हुई लगभग 16 कंपनियों को सरकार द्वारा पुनः स्थापित किया जाए।

