रुड़की: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की के शोधकर्ताओं ने एक बार फिर से कमाल किया है. उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और फैशन डिजाइन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण नवाचार किया है. आईआईटी रुड़की ने एक तरह से भारत का पहला फैशन-स्केच एआई डेटासेट फ्लोरा और अत्याधुनिक नेरा अडैप्टर विकसित किया है. माना जा रहा है कि आईआईटी रुड़की का ये अविष्कार (Invention) भविष्य में फैशन डिजाइन के क्षेत्र को एक नई दिशा देगा.
ड्रेसिंग द इमेजिनेशन: एक तरह से कहा जा सकता है कि आईआईटी रुड़की के शोधकर्ताओं ने एआई को फैशन की पेशेवर भाषा सिखाई है. शोधकर्ताओं का कहना है कि फैशन कल्पनाशीलता पर आधारित होता है. डिज़ाइनरों को रचनात्मक विचारों और अवधारणाओं को स्केच में बदलने के लिए काफी समय लगता है.
साथ ही फैशन डिज़ाइनरों को नवीनतम रुझानों के अनुरूप व्यक्तिगत कपड़े भी डिजाइन करने पड़ते है. पहले ग्राहक नीली शर्ट जैसे साधारण शब्दों के माध्यम से परिधान खोजते थे, जबकि आज के ग्राहक और डिज़ाइनर मिनिमलिस्ट, क्रॉप्ड रेयॉन ब्लाउज़, जिसमें मैंडरिन कॉलर और रैगलन स्लीव्स हों जैसी जटिल और पेशेवर शब्दावली का उपयोग करते हैं.
वर्तमान में उपलब्ध कई एआई उपकरण इस प्रकार की पेशेवर फैशन भाषा को समझने में सक्षम नहीं हैं, लेकिन आईआईटी रुड़की के शोधकर्ताओं के द्वारा तैयार किया गया एआई विस्तृत परिधान शब्दावली समझने और उसे फैशन स्केच में रूपांतरित की काबिलियत रखता है.
यह शोध आईआईटी रुड़की के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार अभियांत्रिकी विभाग व मेहता फैमिली स्कूल ऑफ डेटा साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के संयुक्त संकाय सदस्य प्रो. स्पर्श मित्तल के नेतृत्व में किया गया है. यह पहल भारत के फैशन उद्योग में एआई-संचालित, सटीक और अभिव्यक्ति पूर्ण डिज़ाइन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
प्रो. स्पर्श मित्तल ने बताया कि वर्तमान में उपलब्ध अधिकांश फैशन डेटासेट फोटोग्राफ या कैटलॉग छवियों पर आधारित होते हैं. ये ऑनलाइन खरीदारी मंचों के लिए उपयोगी हैं, लेकिन वे उन स्केचों को प्रतिबिंबित नहीं करते, जिन्हें डिज़ाइनर सामान्यतः अपनी स्केच बुक में बनाते हैं. फ्लोरा इस दृष्टि से विशिष्ट है, क्योंकि इसमें पेशेवर फैशन स्केच और उनके पाठ्य विवरणों की युग्मित प्रविष्टियां सम्मिलित हैं, जिनमें सिलुएट, सामग्री, बनावट और समग्र शैली जैसी तकनीकी शब्दावली का उपयोग किया गया है.
प्रो. स्पर्श मित्तल के अनुसार जब किसी एआई मॉडल को फ्लोरा डेटासेट पर प्रशिक्षित किया जाता है, तो वह विस्तृत शब्दों और उनके अनुरूप दृश्य विशेषताओं के बीच संबंध स्थापित करना सीखता है. परिणामस्वरूप, यह एआई मॉडल केवल नीली ड्रेस जैसे सरल विवरण ही नहीं, बल्कि ”कोबाल्ट नीले रंग का सायंकालीन गाउन, जिसमें मुलायम ड्रेप्ड काउल नेकलाइन और रूच्ड बॉडिस हो” जैसे जटिल विवरणों को भी समझ सकता है.
फ्लोरा के साथ-साथ नेरा (नॉनलिनियर एक्सप्रेसिव रिप्रेज़ेंटेशन अडैप्टर) एक नई विधि है, जो एआई मॉडलों को इन डिज़ाइन संबंधों को अधिक तेज़ी और सटीकता से सीखने में सहायता करती है. फ्लोरा और नेरा को ओपन-सोर्स रूप में जारी किया जाना वैश्विक स्तर पर शोधकर्ताओं और डिज़ाइनरों को कला, प्रौद्योगिकी और सततता के संगम पर सहयोग और नवाचार के लिए सशक्त बनाएगा
आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत ने टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह उल्लेखनीय उपलब्धि आईआईटी रुड़की की अत्याधुनिक अंतर्विषयक अनुसंधान के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है. फ्लोरा और नेरा जैसी नवाचारात्मक पहलें यह प्रदर्शित करती हैं कि एआई का उपयोग भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था को सशक्त करने और डिजाइन व प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व को सुदृढ़ करने के लिए कैसे किया जा सकता है.
मेक इन इंडिया: यह नवाचार डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया और राष्ट्रीय एआई मिशन सहित भारत के प्रमुख राष्ट्रीय अभियानों को प्रत्यक्ष रूप से समर्थन देता है, क्योंकि यह रचनात्मक उद्योगों को सशक्त बनाने वाली स्वदेशी प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देता है और सतत डिज़ाइन समाधानों को प्रोत्साहित करता है.
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