नई दिल्ली: बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रही हिंसा के साथ ही वहां के मंदिरों में भी खामोशी के साये में देवों की पूजा हो रही है। घंटे-घड़ियाल और शंखनाद की गूंज भी वहां थम गई है। मंदिरों में चारों पहर की आरती और पूजा नहीं हो पा रही है। जिन इलाकों में हिंसा का प्रभाव ज्यादा है, वहां के मंदिरों में पूजा-पाठ पूरी तरह से ठप है। जान बचाने के लिए मंदिरों के महंत, पुजारी अपनी पहचान छिपाने को मजबूर हैं। न तिलक लगा पा रहे हैं और न ही हाथों में रक्षा बांध रहे हैं।
बांग्लादेश के चटगांव के स्वयंभू मंदिर के पुजारी ने भक्तों को फोन ये जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि वहां मंदिरों में चारों पहर की आरती बंद है। चरमपंथी हमेशा चक्रमण करते रहते हैं। बचकर ही पूजा-पाठ की जा रही हैं। हिंदू संगठन के पदाधिकारी अशोक ने फोन पर बताया कि हमले के डर से हर कोई छिपकर रह रहा है। खासकर मंदिरों के महंत, पुजारी इलाकों में न तो तिलक लगाकर निकलते हैं और न ही हाथों में रक्षासूत्र बांधकर। सबसे प्रसिद्ध ढांकेश्वरी देवी मंदिर में भी दर्शन-पूजन में समस्याएं हो रही हैं।
इंटरनेशनल वेदांत सोसाइटी के अनुयायी गौतम ने फोन पर बताया कि भजन-कीर्तन पूरी तरह से बंद है। पूजा में शंख वादन भी बंद है। काशी में गुरु के जन्मोत्सव में शामिल होने आए स्वामी निर्गुणानंद ने बताया कि जबसे वहां का माहौल खराब हुआ है, अनुयायियों ने यहां आना बंद कर दिया है।
बांग्लादेश में हैं पांच शक्तिपीठ
51 शक्तिपीठों में पांच शक्तिपीठ बांग्लादेश में हैं। उनकी भी स्थिति खराब है। डॉ. अभिषेक द्विवेदी गणेश ने बताया कि वहां जयंतिया, सुमंधा, जेसोरेश्वरी आदि शक्तिपीठों में भीड़ होती है। मगर, जबसे वहां का माहौल खराब हुआ है, इक्का-दुक्का ही भक्त पहुंच रहे हैं। ज्यादा प्रभावित इलाकों के मंदिरों में पूजा पाठ भी ठप है।
गृहमंत्री से हिंदुओं व मंदिरों की सुरक्षा की मांग
सेंटर फॉर सनातन रिसर्च ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमले को रोकने के लिए केंद्र सरकार से हस्तक्षेप करने की मांग की है। संस्था के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अभिषेक द्विवेदी गणेश ने बताया कि गृहमंत्री अमित शाह को पत्र भेजा गया है। अगर, सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं आए जाते हैं तो यहां से दल वहां जाएगा। मंदिरों और हिंदुओं की रक्षा के लिए आवाज उठाएंगे।
बांग्लादेश में पूजा-पाठ पर संकट, न हाथों में बांध पा रहे रक्षासूत्र, न ही लगा पा रहे तिलक
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