नैनीताल। उत्तराखंड में जल संस्थान में अवर अभियंता के पद पर कार्यरत याचिकाकर्ता को पुरानी पेंशन योजनाओं का लाभ दिए जाने को लेकर दायर याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. मामले की सुनवाई अवकाश कालीन न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की पीठ में हुई. पीठ ने राज्य सरकार समेत जल संस्थान से तीन हफ्ते के भीतर जवाब पेश करने को कहा है. साथ ही कोर्ट ने ये भी कहा है कि याचिकाकर्ता के देयकों का भुगतान याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगे.
क्या है मामला? दरअसल, ललित मोहन पांडे ने नैनीताल हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की है. जिसमें याचिकाकर्ता ने कहा है कि उन्होंने जल संस्थान में अवर अभियंता पद के लिए आवेदन किया था. साल 2002 की चयन प्रक्रिया के तहत 15 जून 2004 को उनका परीक्षा परिणाम घोषित हुआ था. वे इस पद के लिए पात्र पाए गए, लेकिन शासन की देरी की वजह से उनको जनवरी 2006 में अवर अभियंता के पद पर जल संस्थान में नियुक्ति दी गई.
याचिकाकर्ता पुरानी पेंशन योजनाओं के तहत दी जाने वाली समस्त लाभों को पाने का हकदार था. पुरानी पेंशन योजनाओं का लाभ पाने का विकल्प भी शासन को दे चुका है. जिसकी संस्तुति भी जल संस्थान ने शासन को भेज दी गई, लेकिन शासन ने 15 दिसंबर 2025 को एक आदेश पारित कर उस संस्तुति को निरस्त कर कहा कि आपको पुरानी पेंशन योजनाओं का लाभ नहीं दिया जा सकता. क्योंकि, आपकी नियुक्ति 2006 में हुई है. जबकि, याचिकाकर्ता 31 जनवरी 2026 को सेवानिवृत्त हो रहा है.
वहीं, आज यानी 22 जनवरी 2026 को मामले में सुनवाई के बाद कोर्ट ने जल संस्थान व राज्य सरकार को तीन हफ्ते के भीतर जवाब पेश करने के आदेश दिए हैं. साथ ही ये भी कहा है कि याचिकाकर्ता के देयकों का भुगतान याचिका के निर्णयाधीन रहेगा. अब पूरे मामले की सुनवाई 3 हफ्ते बाद हो सकती है.
सहायक अध्यापक पद पर काउंसलिंग मामले पर भी सुनवाई: नैनीताल हाईकोर्ट में जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक चंपावत की ओर से सहायक अध्यापक पद के लिए हो रही काउंसलिंग न कराने के मामले पर सुनवाई की. मामले की सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ ने जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक चंपावत से कहा है कि वो याचिकाकर्ता की काउंसलिंग कराएं.
क्या है पूरा मामला? दरअसल, हल्द्वानी निवासी भावना उप्रेती ने नैनीताल हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर कहा है कि वर्तमान में राज्य के हर जिले में सहायक प्राइमरी अध्यापकों की काउंसलिंग चल रही है. उनकी भी 12 जनवरी 2026 को जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक चंपावत के वहां काउंसलिंग हुई.
बेसिक शिक्षा अधिकारी चंपावत ने एक कार्यालय आदेश जारी कर सभी काउंसिलिंग में प्रतिभाग करने वालो से कहा कि वे काउंसलिंग कराने के लिए 11 बजे काउंसलिंग स्थल में उपस्थित रहे. साथ में ये भी कहा कि काउंसिलिंग मेरिट के आधार पर होगी. याचिकाकर्ता काउंसलिंग स्थल में 12 बजे पहुंची. जिसकी वजह से उनकी काउंसलिंग नहीं हुई.
उनसे कहा गया कि वे देर से पहुंचीं हैं. जबकि, 74 प्रतिशत अंक पाने वालों तक की काउंसलिंग की गई. उनके 74.4 प्रतिशत अंक थे. अगर उनकी काउंसलिंग हो जाती तो उनका चयन सहायक अध्यापक प्राइमरी के लिए हो सकता था. उन्होंने याचिका में ये भी कहा है कि काउंसलिंग में देर से पहुंचने का मुख्य कारण यह भी था कि उनके साथ उनका ढाई साल का बेटा भी था.
जिसकी वजह से वो निर्धारित तय समय 11 बजे काउंसलिंग स्थल पर नहीं पहुंच सकी. याचिका में कोर्ट से प्रार्थना की गई है कि उनकी काउंसलिंग कराई जाए. जिस पर कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा है कि वो अपनी काउंसलिंग कराने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक चंपावत के वहां 24 जनवरी 2026 को 11 बजे उपस्थित होकर अपनी काउंसलिंग कराएं.
जल संस्थान के जेई को पुरानी पेंशन योजनाओं का लाभ देने के मामले पर हुई सुनवाई, जानिए पूरा मामला

