ऋषिकेश। उत्तराखंड में साइबर ठगी के मामलों में बढ़ोत्तरी हुई है। चार अलग-अलग मामलों में पीड़ितों से करीब 86 लाख रुपए की ठगी हुई है। ऋषिकेश में एक बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट कर 69 लाख रुपए ठग लिए। कभी ईडी तो कभी सुप्रीम कोर्ट का अधिकारी बन ठगों ने 81 साल के बुजुर्ग को 60 दिन डिजिटल अरेस्ट रखा। वहीं, देहरादून में मनी लॉन्ड्रिंग में फंसाने का डर दिखा युवक से 14 लाख से ज्यादा हड़प लिए।
जानकारी के अनुसार, गंगानगर में रहने वाले एक बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट करने का मामला सामने आया है। ठगों ने 60 दिनों तक मानसिक रूप से बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर उत्पीड़न किया। 69 लाख रुपये की रकम ऑनलाइन खातों में ट्रांसफर कराई। बुजुर्ग को जब ठगी का एहसास हुआ, तो उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र भेज शिकायत की। साइबर थाने को भी शिकायत देकर ठगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की।
ईडी अधिकारी बन लाखों ठगे
वहीं, शिकायत पर पुलिस ने मामले में जांच शुरू कर दी है। ऋषिकेश स्थित गंगानगर की गली नंबर नौ में 81 वर्षीय भगवत नारायण झा और उनकी 74 वर्षीय पत्नी कमल झा रहते हैं। भगवत ने बताया कि 17 नवंबर 2025 को उनके मोबाइल पर कॉल आई। कॉलर ने खुद को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और सुप्रीम कोर्ट का अधिकारी बताया और अवैध लेनदेन में संलिप्त बताते हुए डिजिटल अरेस्ट किया।
साइबर ठगी से बचाव और शिकायत का तरीका
साइबर ठगी से बचने के लिए सबसे जरूरी है सतर्कता। याद रखें, डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई व्यवस्था नहीं होती, इसलिए ठगों के डराने या धमकाने पर घबराएं नहीं और तुरंत पुलिस को सूचना दें। किसी को भी डिवाइस एक्सेस कोड, ओटीपी या पासवर्ड कभी साझा न करें और अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें। सोशल मीडिया, व्हाट्सएप या अनजान नंबरों से आने वाली कॉल और मैसेज को लेकर विशेष सावधानी रखें तथा बेहद सस्ते या लुभावने ऑफर के जाल में न फंसें। यदि साइबर ठगी हो जाती है, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
उत्तराखंड : मनी लॉन्ड्रिंग का डर दिखाकर बुजुर्ग से ठगी, 60 दिन डिजिटल अरेस्ट कर 69 लाख लुटे
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