हल्द्वानी। वर्ष 2008 में जिस मदरसा कमेटी पर चंदे के पैसों के दुरुपयोग और हिसाब न देने के गंभीर आरोप लगे थे, आज 18 साल बीत जाने के बाद भी वही कमेटी पारदर्शिता से दूर नजर आ रही है। मदरसे का ये विवाद इन दिनों सोशल मीडिया में चर्चा के विषय बना हुआ है।
बताया जाता है कि 18 साल पहले के समय आरोप इतने गंभीर थे कि मदरसे के जिम्मेदार पदाधिकारी को इस्तीफा तक देना पड़ा था और लाखों रुपये के गबन की शिकायत पुलिस में भी दर्ज हुई थी। बच्चों की संख्या ज्यादा दिखाकर चंदा इकट्ठा करने, खर्च का सही ब्यौरा न देने और कागजों में हेराफेरी जैसे आरोप सामने आए थे।
मोहम्मद शाह ने बनाया था अध्यातुल मदरसा
जानकारी के मुताबिक, ये अध्यायुल उलूम मदरसा 1956 में मोहम्मद शाह ने स्थापित किया था और इसका हिसाब किताब और इसकी देखरेख अपने शागिर्द मोहतामिम मौलाना मोईद कासमी के हवाले किया था। मोहम्मद शाह रहे नहीं, और मौलाना मोहम्मद सालिम हयाति इसकी देखरेख में शामिल हो गए। जब 18 साल पहले इसको मिलने वाली चंदे और खर्च के हिसाब किताब की बात उठी तो कई घपले सामने आए बताया गया कि उस दौरान पुलिस में रिपोर्ट भी दर्ज हुई किंतु राजनीतिक आकाओं के संरक्षण मिलने से कुछ नहीं हुआ और मामला दब गया।
अब सवाल यह उठता है कि इतने साल गुजर जाने के बाद भी कमेटी ने क्या सीखा? जवाब साफ है–आज भी हालात वही हैं। कमेटी न तो अपना हिसाब सार्वजनिक कर रही है, और न ही यह बता रही है कि वर्तमान में इसके मेंबर कौन-कौन हैं। स्थानीय लोगों और समाज के जिम्मेदार नागरिकों का कहना है कि जब संस्था साफ है, तो मेंबरों के नाम छुपाने की जरूरत क्यों? जानकार बताते है कि चंदे और दान से चलने वाली संस्था का सबसे पहला फर्ज होता है पारदर्शिता, लेकिन यहां उल्टा हो रहा है – सवाल पूछने वालों को ही नजरअंदाज किया जा रहा है।
लोगों का मानना है कि 18 साल पहले जो हुआ, वही दोहराया जा रहा है, फर्क सिर्फ इतना है कि अब आरोपों का जवाब देने की बजाय चुप्पी साध ली गई है। समाज अब सिर्फ भरोसे पर नहीं, सबूत और हिसाब पर विश्वास चाहता है। अब मांग उठ रही है कि प्रशासन इस पूरे मामले में दखल दे और कमेटी को मजबूर करे कि वह अपने सभी मेंबरों की सूची सार्वजनिक करे और पिछले वर्षों का हिसाब-किताब समाज के सामने रखे ताकि चंदे का पैसा सही जगह खर्च हो और भविष्य में किसी तरह की गड़बड़ी न हो। जानकारी के मुताबिक डीएम नैनीताल ललित मोहन रयाल ने इस मामले का संज्ञान लिया है और उन्होंने अपने अधीनस्थ अधिकारियों को जांच पड़ताल करने को कहा है।
मदरसा कमेटी पर चंदे के पैसों के दुरुपयोग के आरोप, हिसाब-किताब की मांग तेज
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