रुड़की। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (IIT) के वैज्ञानिकों ने मेडिकल साइंस की दुनिया में कमाल कर दिया है. जिसके तहत वैज्ञानिकों ने एक अगली पीढ़ी का एंटीबॉडी खोज मंच विकसित किया है, जो वैश्विक स्तर की बीमारियों के निदान के साथ उपचारों को रूपांतरित करने की क्षमता रखता है. इसके साथ ही आईआईटी रुड़की ने किफायती स्वास्थ्य सेवा, महामारी की तैयारी और स्वदेशी जैव प्रौद्योगिकी नवाचार की दिशा में अहम कदम बढ़ाया है.
आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों के नेतृत्व में किया गया यह अहम अनुसंधान एक काफी बड़ी, हाई डायवर्सिटी, सिंगल डोमेन एंटीबॉडी (नैनो बॉडी) लाइब्रेरी के विकास से संबंधित है. यह मंच संक्रामक बीमारी, कैंसर, स्वप्रतिरक्षा विकार (Autoimmune Disorders) और उभरते रोग जनकों समेत व्यापक लक्ष्यों के खिलाफ काफी स्थिर एवं उच्च आसक्ति एंटीबॉडी की तेज पहचान को सक्षम बनाता है.
प्रोफेसर राजेश कुमार ने बताया कि यह शोध संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों के साथ सुदृढ़ रूप से जुड़ी हुई है. खासकर एसडीजी 3 (अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण), एसडीजी 9 (उद्योग, नवाचार और अवसंरचना) और एसडीजी 17 (लक्ष्यों के लिए साझेदारियां) के साथ जुड़ी है. जो खासकर निम्न और मध्यम आय वाले देशों के लिए फायदेमंद होगा, जहां आज भी समय पर और लागत प्रभावी स्वास्थ्य समाधानों तक पहुंच एक सतत चुनौती बनी हुई है.
यह पहल भारत सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं, जिनमें आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया शामिल हैं, उनका भी समर्थन करती है. क्योंकि, यह स्वदेशी अनुसंधान क्षमताओं को सुदृढ़ करती है. बौद्धिक संपदा का सृजन करती है और आयातित जैविक उत्पादों पर निर्भरता को कम करती है. यह अनुवादात्मक शोध को बढ़ावा देने, महामारी की तैयारी को सुदृढ़ करने और दीर्घकालिक स्वास्थ्य लचीलापन निर्मित करने के राष्ट्रीय प्रयासों का पूरक है.
वास्तविक दुनिया परिनियोजन को तेज करने के लिए आईआईटी रुड़की ने प्रौद्योगिकी अंतरण, विस्तार और एंटीबॉडी आधारित समाधानों के सत्यापन के समर्थन के लिए एक रणनीतिक उद्योग अकादमिक सहयोग स्थापित किया है. इसके तहत संस्थान ने आईएमजीनएक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं. ताकि, सहयोगात्मक अनुसंधान, उन्नत जैविक उत्पादों का सह विकास और एंटीबॉडी अभियांत्रिकी, निदान, उपचार और जैव प्रसंस्करण विकास जैसे क्षेत्रों में क्षमता निर्माण को बढ़ावा दिया जा सके.
वहीं, आईएमजीनएक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के एक वरिष्ठ प्रतिनिधि ने कहा कि ‘आईआईटी रुड़की के साथ यह सहयोग अकादमिक अनुसंधान और औद्योगिक विकास में पूरक शक्तियों को एक साथ लाता है. जिसका साझा उद्देश्य अगली पीढ़ी की एंटीबॉडी प्रौद्योगिकियों को मापनीय और किफायती स्वास्थ्य समाधानों में रूपांतरित करना है.’
IIT रुड़की के वैज्ञानिकों ने मेडिकल साइंस की दुनिया में किया कमाल
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