सिंह की दहाड़ पर, जुर्म के पहाड़ पर, दुश्मनों के सीने से चढ़े चलो, बढ़े चलो गढ़वालियों, बढ़े चलो।।
गढ़वाल राइफल्स ये वो नाम है जो गढ़वाल के युवाओं में एक अलग ही जोश भरता है। गढ़वाल राइफल्स एक थल सेना रेजिमेंट है। जिसकी स्थापना 5 मई 1887 को अल्मोड़ा मे हुई थी, लैंसडाउन छावनी उत्तराखंड राज्य के जिला पौड़ी गढ़वाल के मध्य में स्थित है, जो सिर्फ एक हिल स्टेशन ही नहीं बल्की गढ़वाल राइफल्स का सेंटर भी है। 1887 तक, गढ़वालियों को बंगाल इन्फैंट्री और पंजाब फ्रंटियर फोर्स से संबंधित गोरखाओं की पांच रेजिमेंटों में भर्ती किया जाता था, गढ़वाल राइफल की स्थापना आजादी से पहले की है और भले ही इसका श्रेय अंग्रेजो को दिया जाता हो पर इसकी स्थापना के पीछे एक गढ़वाली बलभद्र सिंह नेगी की ही सोच थी। उन्होंने ही सबसे पहले गढ़वाल पल्टन बनाने का प्रस्ताव रखा था, जिसके आधार पर गढ़वाल राइफल नाम रखा गया और इसका नारा है “जय बद्री विशाल लाल की” ,

गढ़वाल राइफल्स स्थापना दिवस के मौके पर उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी अपने सोशल मीडिया के जरिए प्रदेश वासियों और सैनिकों को बधाई दी है।
The Newswala Network की तरफ़ से भी सभी सैनिको, सैनिक परिवारों और प्रदेश वासियों को गढ़वाल राइफल्स स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

