चमोली: उत्तराखंड में मां नंदा की ‘बड़ी जात’ इसी वर्ष 2026 में आयोजित की जाएगी। परंपरागत मान्यताओं के अनुसार, 5 सितंबर 2026 को मां नंदा अपने सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर से कैलाश यात्रा के लिए विदा होंगी। बताया जा रहा है कि मां नंदा ने अपने मुख्य अवतारी पुरुष पर अवतरित होकर इसी वर्ष कैलाश जाने की इच्छा जताई, जिसके बाद गौड़ ब्राह्मणों ने विधिवत रूप से बड़ी जात आयोजन का दिनपट्टा तय कर दिया।
दिनपट्टा तय होने के साथ ही मां नंदा की बड़ी जात को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। बड़ी जात यात्रा समिति ने आयोजन की रूपरेखा तैयार करते हुए 21 दिन का यात्रा कार्यक्रम भी घोषित कर दिया है। समिति के अनुसार, इस बार यात्रा को पारंपरिक विधि-विधान और तय कार्यक्रम के अनुसार संचालित किया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
कुरुड़ मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना
वसंत पंचमी के अवसर पर शुक्रवार को कुरुड़ मंदिर परिसर में दिनपट्टा कार्यक्रम आयोजित किया गया। सुबह करीब 8 बजे मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए गए। दिनपट्टा कार्यक्रम के दौरान मां नंदा की बड़ी जात की तिथि तय होने की घोषणा से श्रद्धालुओं में उत्साह और श्रद्धा का माहौल देखने को मिला।
आस्था, परंपरा और संस्कृति का महापर्व
मां नंदा की बड़ी जात को उत्तराखंड की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक यात्राओं में शामिल माना जाता है। यह यात्रा सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि पहाड़ की लोक परंपरा, संस्कृति और सामूहिक आस्था का प्रतीक भी है। 21 दिन की इस यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां नंदा के साथ चलते हैं और जगह-जगह पारंपरिक पूजा, जागर और धार्मिक आयोजन होते हैं।
श्रद्धालुओं में उत्साह, यात्रा को लेकर बढ़ी हलचल
बड़ी जात की तिथि तय होने के बाद अब श्रद्धालुओं में यात्रा को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस आयोजन से न सिर्फ धार्मिक माहौल बनता है, बल्कि क्षेत्र में पर्यटन और स्थानीय व्यापार को भी बढ़ावा मिलता है।
उत्तराखंड: दिनपट्टा तय होने के साथ ही ‘मां नंदा’ की बड़ी जात को लेकर तैयारियां तेज
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