देहरादून। उत्तराखंड में अंकिता भंडारी की हत्या को तीन साल से अधिक और मामले में आरोपियों को सजा सुनाए जाने के सात महीने बाद एक बार फिर यह केस सुर्खियों में है। एक वरिष्ठ भाजपा नेता की कथित संलिप्तता के आरोप सामने आने के बाद उत्तराखंड में व्यापक विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। कांग्रेस, वाम दलों और कई नागरिक संगठनों ने पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग तेज कर दी है। इस बीच भाजपा में भी खींचतान देखी जा रही है। सत्तारूढ़ भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने सीबीआई जांच की मांग का समर्थन किया है, लेकिन पार्टी नेतृत्व और सरकार ने अब तक इस पर कोई स्पष्ट रुख नहीं अपनाया है।
शुरुआत से ही इस मामले में किसी “वीआईपी” की मौजूदगी की चर्चाएं होती रही हैं, लेकिन SIT ने किसी प्रभावशाली नेता की संलिप्तता के ठोस सबूत नहीं मिलने की बात कही थी। वीआईपी एंगल की सीबीआई जांच की मांग सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची थी, जिसे मार्च 2025 में यह कहते हुए निस्तारित कर दिया गया कि मामले का ट्रायल चल रहा है।
उर्मिला सनावर के नए आरोप
मामले में ताजा बवाल उस समय खड़ा हुआ जब उर्मिला सनावर नामक महिला ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी किए। उर्मिला खुद को पूर्व हरिद्वार भाजपा विधायक सुरेश राठौर की दूसरी पत्नी बताती हैं। उन्होंने दावा किया कि अंकिता की हत्या “गट्टू” नाम के एक नेता को अतिरिक्त सेवाएं देने से इनकार करने के कारण हुई। बाद में एक और वीडियो में उर्मिला ने कथित ऑडियो क्लिप जारी की, जिसमें सुरेश राठौर द्वारा भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री दुष्यंत गौतम का नाम मामले से जोड़ने का आरोप लगाया गया। इसके बाद सुरेश राठौर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ऑडियो को “AI से बनाया गया फर्जी” बताते हुए आरोपों को खारिज किया। हरिद्वार और देहरादून में उर्मिला और राठौर के खिलाफ आईटी एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की गईं।
भाजपा के भीतर खींचतान
इस बीच मामले में भाजपा के भीतर खींचतन की स्थिति भी देखी जा रही है। हरिद्वार सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि चाहे नेता कितना भी बड़ा क्यों न हो, गंभीर आरोपों की जांच होनी चाहिए। पूर्व मंत्री और भाजपा नेता विजया बर्थवाल ने भी नए सिरे से जांच की मांग करते हुए कहा कि देवभूमि में हुई इस घटना पर अब भी कई सवाल बाकी हैं।
वहीं, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने आरोपों को खारिज किया। वन मंत्री सुबोध उनियाल ने आरोप लगाने वालों से सबूत पेश करने को कहा, जबकि राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने आंदोलन को राजनीतिक और अराजक तत्वों से प्रेरित बताया।
सरकार पर बढ़ता दबाव
नए आरोपों और आंदोलनों के चलते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार पर दबाव बढ़ गया है। यह मामला यूकेएसएसएससी पेपर लीक, बेरोजगारी और पलायन जैसे मुद्दों के बाद सामने आया है। विपक्ष के सवालों के बाद सीएम धामी ने कहा कि अंकिता मामले में किसी को भी बचाया नहीं गया है और भविष्य में भी कोई दोषी बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने अंकिता के परिजनों से मिलने और उनकी मांगों के अनुसार कार्रवाई करने की बात कही।
दुष्यंत गौतम ने आरोपों को निराधार बताया
वहीं, मामले में दुष्यंत गौतम ने आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि अगर आरोप सही साबित होते हैं तो वे सार्वजनिक जीवन से इस्तीफा दे देंगे। उन्होंने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी समेत कई दलों पर मानहानि का मुकदमा किया। साथ ही पुलिस में सबूत पेश किया कि वे 10 मार्च 2022 से 20 मार्च 2022 के बीच उत्तराखंड में ही नहीं थे।
कांग्रेस की न्याय यात्रा
विपक्ष इस मुद्दे को पहाड़ी जिलों में भाजपा के खिलाफ माहौल बनाने के तौर पर देख रहा है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि समान विचारधारा वाले दलों के साथ गठबंधन हुआ तो 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को कड़ी चुनौती दी जा सकती है। कांग्रेस ने पूरे प्रदेश में “न्याय यात्रा” निकालने की भी घोषणा की है, जिसमें कैंडल मार्च और प्रदर्शन शामिल होंगे।
अंकिता भंडारी केस : सीबीआई जांच पर नेताओं के बदले सुर, सरकार पर बढ़ा दबाव
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