नई दिल्ली। फोन में आने वाले अनजान कॉल पर अब आपको कभी-कभी कॉलर का नाम भी दिखाई देता है। टेलीकॉम विभाग (DoT) और टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने भारत में धीरे-धीरे Calling Name Presentation (CNAP) का रोलआउट शुरू किया है। इसके चलते ही मोबाइल फोन पर आने वाले अनजान कॉलर का नाम दिख रहा है। यह सेवा चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में लागू होनी है। इससे के जरिए सरकार स्कैम और धोखाधड़ी पर लगाम लगाने की कोशिश कर रही है।
CNAP के शुरू हो जाने के बाद फोन की मौजूदा कॉलर आईडी सिस्टम में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। पहले जहां सिर्फ फोन नंबर देखने को मिलता था, अब यूजर्स को कॉलर का रजिस्टर्ड नाम भी दिखाई देगा। इससे वे यह तय कर पाएंगे कि उन्हें कॉल रिसीव करनी है या नहीं। रिपोर्ट्स की मानें तो यह सर्विस 31 मार्च 2026 तक पूरे देश में उपलब्ध होने की उम्मीद है। यहां हम आपको CNAP सर्विस कैसे काम करती है। इसके बारे में डिटेल में जानकारी दे रहे हैं।
CNAP सर्विस क्या है और कैसे काम करती है?
कॉलर नेम प्रेजेंटेशन (CNAP) एक सप्लीमेंट्री सर्विस है, जो कॉलिंग पार्टी की कॉलिंग नेम इन्फॉर्मेशन उपलब्ध करवाएगी। इसके तहत यूजर्स के फोन में आने वाले अनजान कॉल के नंबर के साथ-साथ कॉलर के नाम के 80 कैरेक्टर शो होंगे। कॉलर आईडी पर यह नाम सिम खरीदने के दौरान दिए डॉक्यूमेंट वाला होगा, जो केवाईसी के लिए दिया गया था।
कॉलिंग के दौरान कॉलर का नाम दिखाने के लिए नेटवर्क ऑपरेटर को कॉल्ड मोबाइल सब्सक्राइबर के CNAP सर्विस को Presentation Indicator (PI) उपलब्ध करवाना होगा। Presentation Indicator (PI) में कॉलर की डिटेल्स अपडेट रहती है। कॉलिंग पार्टी को कॉल्ड पार्टी को हर कॉल के लिए CNAP डेटा उपलब्ध करवाना होगा। CNAP एसएमएस को छोड़कर सभी टेलीकम्युनिकेशन सर्विस के अनिवार्य रहेगा।
CNAP सर्विस भारत में कब शुरू होगी?
CNAP फ्रेमवर्क भारत में सभी 4जी और 5जी नेटवर्क के लिए रोल आउट होना है। इस सर्विस का पायलट प्रोजेक्ट अक्टूबर 2025 में शुरू हुआ था। उम्मीद है कि यह इस साल मार्च 31 तक पूरे देश में शुरू हो जाएगा।
CNAP सीधे टेलीकॉम नेटवर्क के जरिए काम करेगा। इससे मोबाइल ऐप्स और इंटरनेट की जरूरत कम रह जाएगी। इसके लिए टेलीकॉम अपनी अपने रिकॉर्ड से सिम खरीदने के दौरान दिए डॉक्यूमेंट का इस्तेमाल करेंगे। जब भी कोई कॉलर कॉल करेगा तो रिसीवर के स्क्रीन पर फोन नंबर के साथ नाम भी दिखाई देगा। यह सर्विस सभी यूजर के लिए इनेबल रहेगी। हालांकि, यूजर्स चाहे तो कॉलर आई रिस्ट्रिक्शन ऑप्शन का इस्तेमाल कर इसे बंद कर सकते हैं
CNAP और Truecaller में क्या अंतर है?
1. CNAP और Truecaller दोनों ही अनजान कॉलर का नाम बताते हैं। हालांकि, दोनों अलग-अलग तरीका यूज करते हैं।
2. CNAP नेटवर्क-आधारित सर्विस है, जो सिम खरीदने के दौरान हुई केवाईसी डॉक्यूमेंट वाला नाम कॉल के दौरान दिखाता है।
3. CNAP के लिए यूजर के फोन में किसी ऐप की जरूरत नहीं है। इसके साथ ही इसे इस्तेमाल करने के लिए इंटरनेट की जरूरत भी नहीं होती है।
Truecaller की बात करें तो यह थर्ड पार्टी ऐप है, जो कॉलर आईडी के लिए अपने क्राउडसोर्स डेटाबेस का इस्तेमाल करती है, जो यूजर के कॉन्टेक्ट लिस्ट से कलेक्ट की गई होती है। यानी इस ऐप में दिखने वाला नाम ऑफिशियल और वेरिफाइड नहीं है। इसके साथ ही Truecaller के लिए इंटरनेट और कॉन्टैक्ट्स लिस्ट एक्सेस की जरूरत होती है।
Truecaller से कितना अलग है सरकारी CNAP और कैसे करता है काम?
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